Wednesday, April 24, 2013

Arushi Murder Case आरुषि-हेमराज को साथ देख राजेश तलवार के सिर पर सवार हुआ खून


गाजियाबाद [जागरण संवाददाता]। बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या के मुख्य आरोपी डा. राजेश तलवार और नूपुर तलवार अब परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर घिरने लगे हैं। मामले के विवेचक व सीबीआइ के एएसपी एजीएल कौल ने कोर्ट में जोड़ी गई कड़ियों के हिसाब से पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि आरुषि व हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखने पर डा.राजेश तलवार ने गोल्फ स्टिक से वार कर हत्याकांड को अंजाम दिया।
सीबीआइ कोर्ट में जिरह के दौरान विशेष लोक अभियोजक आरके सैनी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता सत्यकेतु सिंह में कुछ शब्दों को लेकर खूब नोकझोंक हुई। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 24 अप्रैल की तारीख निश्चित की है। मंगलवार को तलवार दंपती भी अदालत में पेश हुए। बचाव पक्ष से जिरह के दौरान एएसपी कौल ने कहा कि 15/ 16 मई, 2008 की रात घर में डा. राजेश तलवार, डा. नूपुर तलवार, आरुषि व हेमराज मौजूद थे। ड्राइवर मुनेश ने चारों को उस रात को आखिरी बार देखा था। हेमराज पर हमला आरुषि के कमरे में उसके बेड पर हुआ और उसके बाद चादर में लपेटकर व घसीटकर छत पर ले जाया गया। वहां पर उसका गला काटा गया।
रात 12 बजे तक डा.राजेश तलवार अपने कमरे में जागे हुए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आरुषि व हेमराज की मौत का समय रात्रि 12 बजे से एक बजे के बीच का है। डा. राजेश ने अपने कमरे में आवाज सुनी तो वह हेमराज को देखने उसके कमरे में गए, लेकिन वह वहां नहीं मिला। उन्होंने हेमराज के कमरे में रखी दो गोल्फ स्टिक में एक उठा ली। इस दौरान उन्हें यह पता चल चुका था कि आवाज आरुषि के कमरे से आ रही थी। आरुषि के कमरे का दरवाजा बंद नहीं था। डा. राजेश ने गोल्फ स्टिक से हेमराज के सिर पर वार किया। दूसरा वार किया तो हेमराज वहां से हट गया और यह वार सीधा आरुषि के माथे पर लगा। इस दौरान डा. राजेश ने कई वार किए। आवाज पर डा. नूपुर भी आरुषि के कमरे में पहुंच गई। तब तक हेमराज बेड से नीचे गिर गया था।
दोनों ने आरुषि की नब्ज देखी तो उसे मृत पाया। इसके बाद दोनों घबरा गए और हेमराज का कत्ल कर शव को छिपाने और मौका मिलने पर उसको डिस्पोज करने की साजिश रची। इसी उद्देश्य से तलवार दंपती ने हेमराज को चादर में लपेटा और घसीटकर सीढि़यों से छत पर ले गए। एक कोने में छोटे धारदार हथियार से उसका गला चीर दिया। साथ ही कूलर का पैनल निकालकर हेमराज के शव पर रख दिया। इसके बाद चादर व धारदार हथियार लेकर फ्लैट में आ गए। वहां से उन्होंने डबल चादर व एक ताला चाबी लिया और वापस छत पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों आरुषि के कमरे में आ गए और बिस्तर पर अस्त-व्यस्त रखे खिलौने व अन्य सामान को अपनी जगह पर रख दिया। बिस्तर की चादर की सलवटें भी ठीक कर दी और आरुषि का गला धारदार हथियार से काट दिया। ताकि आरुषि व हेमराज के गले के जख्म एक तरह के दिखाई पडे़।
कौल ने कहा कि डा. नूपुर तलवार ने आरुषि के संवेदनशील अंग को साफ किया और उसे अंत:वस्त्र व पायजामा पहना दिया। इसके बाद वहां पडे़ खून को साफ किया। इंटरनेट के राउटर से छेड़छाड़ की। खून से सने कपड़े व धारदार हथियार एक साथ रख दिए। गोल्फ स्टिक भी साफ करके आरुषि के कमरे की दुछत्ती में छिपा दी और सबसे बाहर का दरवाजा अंदर से तथा बीच के लोहे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। इस दौरान डा. राजेश वेलेंटाइन व्हिस्की बिना पानी के पीते रहे और नौकरानी के सामने आरुषि की हत्या का आरोप हेमराज पर मढ़ दिया।

Sunday, April 21, 2013

मिड-डे मील में अंडा करी बनी जी का जंजाल

श्यामपुर। बच्चों को प्रोटीन युक्त खाना मिले, इसके लिए शिक्षा विभाग ने मिड-डे मील के तहत प्रत्येक बुधवार को स्कूलों में अंडाकरी बनाए जाने की व्यवस्था की थी। लेकिन शाकाहारी और मांसाहारी के फेर में मामला थोड़ा उलझ गया है। कुछ भोजन माताएं खाना बनाने में आनाकानी करने लगीं हैं तो कुछ बच्चे खाना खाने से ही परहेज करने लगे हैं।
विभाग ने तीर्थनगरी के समीपवर्ती क्षेत्र न्याय पंचायत श्यामपुर के सभी स्कूलों में मध्याह्न भोजन में प्रत्येक बुधवार को बच्चों के लिए साबूत मसूर की दाल की जगह अंडाकरी बनाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश खंड शिक्षा अधिकारी ने तमाम संकु लों में भेजे हैं।
कई स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे, शिक्षक और भोजन माता विशुद्ध रूप से शाकाहारी हैं। ऐसे में विद्यालयों में अंडाकरी बनाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। कई बच्चों ने तो अंडाकरी बनने के बाद से विद्यालयों में मिड-डे मील खाना ही बंद कर दिया है। अभी नवरात्र के दौरान कई विद्यालयों में अंडाकरी के मीनू को लेकर असमंजस बना रहा कि कैसे इसे बनाया जाए।

Tuesday, April 2, 2013

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने प्रदेश भर से भेजे मुख्यमंत्री को ज्ञापन

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की प्रदेश कार्यकारिणी की हरिद्वार में पिछले महीने 16 मार्च , 2013 को बैठक में लिए गए फैसले के क्रम में मंगलवार को यूनियन की प्रदेश भर की सभी नगर , तहसील और जिला इकाइयाँ अपने जनपद के जिलाधिकारी अथवा नगर में उपलब्ध अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नाम अट्ठारह सूत्रीय मांग - पत्र के ज्ञापन भेजे । 

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन द्वारा प्रदेश के कोने - कोने से मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए ज्ञापनों में प्रदेश में प्रेस मान्यता और विज्ञापन मान्यता समितियों का विधिवत गठन किए जाने , अपर जिला सूचनाधिकारी / सूचनाधिकारी एवं सूचना तथा जन सम्पर्क से प्रत्यक्ष / परोक्ष रूप में जुड़े तमाम पदों की नियुक्ति में इन पदों की शैक्षणिक योग्यता / अहर्ता में पत्रकारिता एवं जन सम्पर्क में स्नातक , स्नातकोत्तर डिप्लोमा या स्नातकोत्तर डिग्री होना अनिवार्य किए जाने ,प्रदेश में तत्काल पारदर्शी सूचना नीति लागू करने और मीडिया परिषद् का गठन किए जाने , राज्य से प्रकाशित अख़बारों और दूसरे समाचार संस्थानों में काम कर रहे श्रमजीवी पत्रकारों को पत्रकारों के लिए गठित वेतन बोर्ड की सिफारिशों के मुताबिक वेतन / भत्ते दिलाए जाने ,राज्य से प्रकाशित तमाम समाचार संस्थानों में डेस्क पर काम करने वाले पत्रकारों एवं ब्लाक स्तर पर कार्य कर रहे पत्रकारों को प्रेस मान्यता दिए जाने ,प्रदेश के सभी श्रमजीवी पत्रकारों का दस लाख रूपये का दुर्घटना बीमा कराये जाने , राज्य के लघु एवं मध्यम श्रेणी के समाचार - पत्र एवं पत्रिकाओं के लिए सुस्पष्ट विज्ञापन नीति बनाए जाने , राज्य सूचना आयोग में प्रदेश के दो वरिष्ट पत्रकारों / संपादकों को सुचना आयुक्त नियुक्त किए जाने , प्रदेश के जिलों , तहसीलों और ब्लाकों से राजधानी आने वाले श्रमजीवी पत्रकारों के लिए पूर्व की भांति देहरादून में तत्काल आवासीय सुविधा बहाल किए जाने सभी समाचार संस्थानों में श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाना सुनिश्चित किए जाने और उत्तराखंड के हरेक जिला एवं तहसील मुख्यालयों में पत्रकारों की आवासीय कालोनियों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराये जाने आदि मांगें शामिल हैं ।ज्ञापन में यूनियन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि मौजूदा राज्य सरकार श्रमजीवी पत्रकारों की समस्याओं को सरासर अनदेखा कर रही है ।

राज्य मुख्यालय देहरादून में यूनियन के अध्यक्ष अनूप गैरोला के नेतृत्व में प्रदेश के सूचना महानिदेशक विनोद शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया । देहरादून जिला इकाई के महासचिव गिरधर शर्मा ने मांग - पत्र प्रस्तुत किया । यहाँ ज्ञापन देने वालों में यूनियन के प्रांतीय कोषाध्यक्ष अविक्षित रमन , सांगठनिक सचिव भूपेन्द्र कंडारी , दर्शन सिंह रावत , अजय गौतम , विकास गुसाईं , नीरज कोहली , रतन सिंह नेगी आदि वरिष्ट पत्रकार शामिल थे । कुमांऊँ के मंडल मुख्यालय नैनीताल में नैनीताल इकाई के अध्यक्ष माधव पालीवाल के नेतृत्व में जिला मजिस्ट्रेट सुश्री निधिमणि त्रिपाठी को ज्ञापन दिया गया । यहाँ ज्ञापन देने वालों में यूनियन के प्रांतीय महासचिव प्रयाग पाण्डे , भूपेन्द्र मोहन रौतेला , किशोर जोशी , हेम भट्ट , ललित जोशी , कुंवर सिंह देव , सुनील बोरा , प्रवीण कपिल , सुरेश कांडपाल , विनोद कुमार , कांता पाल , धर्मा चंदेल आदि पत्रकार शामिल थे । हल्द्वानी में यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष पंकज वार्ष्वेय के अगुवाई में यूनियन के नैनीताल जिला इकाई के कोषाध्यक्ष गौरव गुप्ता , महेन्द्र नेगी , रवि दुर्गापाल , नाजिम एवं योगेश आदि पत्रकारों ने सिटी मजिस्ट्रेट आई . डी . पालीवाल को ज्ञापन सौंपा । यूनियन की रामनगर इकाई ने यूनियन के अध्यक्ष एवं इलैक्ट्रोनिक मीडिया प्रकोष्ट के प्रांतीय संयोजक गणेश रावत की अगुवाई में प्रभात ध्यानी , जितेन्द्र पपनै , गोविन्द पाटनी , मदन बिष्ट , त्रिलोक रावत और डॉ . जफर जैदी ने एसडीएम के द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा ।

यूनियन की हरिद्वार जिला इकाई के जिला अध्यक्ष डॉ . शिव शंकर जायसवाल की अगुवाई में जिले के जिला अधिकारी सचिन कुर्वे को ज्ञापन दिया गया । ज्ञापन देने वालों में यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ . रजनीकांत शुक्ल , डॉ . हिमांशु द्विवेदी , श्रवण झा , संजय आर्य , दीपक नौटियाल , अमित कुमार , प्रवीन झा ,महेश पारीख , एहसान अंसारी , नरेश सैनी , राम नरेश यादव , जितेन्द्र चौरसिया , बिक्रम झाझर , एवं वेद प्रकाश चौहान आदि पत्रकार शामिल थे । कोटद्वार में वरिष्ट पत्रकार देवेन्द्र सिंह , राज गौरव नौटियाल , जगमोहन रावत , नवीन नेगी , अनिल सती आदि पत्रकारों ने ज्ञापन दिया । जबकि पौड़ी जिले में यूनियन के प्रांतीय सचिव त्रिभुवन उनियाल के नेतृत्व में ज्ञापन दिया गया ।

कुमांऊँ मंडल के सीमान्त जिले पिथौरागढ़ में यूनियन के जिला अध्यक्ष जगदीश कलौनी के नेतृत्व में योगेश पाठक , ललित जोशी , बिजेंद्र लूंठी , प्रकाश पाण्डे , दीपक गुप्ता , मनोज चंद , राकेश पन्त , फरहान अहमद , दिनेश अवस्थी , सुशील खत्री , जीवन सिंह बोरा , एवं दिलीप वाल्दिया आदि पत्रकारों ने जिला प्रशासन के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा । यूनियन की अल्मोड़ा , चम्पावत और बागेश्वर जिले की इकाइयों ने जिला प्रशासन के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे । उधमसिंह जिले में यूनियन के जिला सचिव प्रेम अरोरा के नेतृत्व में जिला प्रशासन के जरिये मुख्यमंत्री को भेजा गया । इसके अलावा उत्तराखंड के दूसरे जिलों से भी यूनियन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजे गए ।

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव प्रयाग पाण्डे ने कहा कि प्रदेश भर की सभी नगर और जिला इकाइयाँ द्वारा श्रमजीवी पत्रकारों की समस्याओं / मांगों को लेकर अपने - अपने जिलों के जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन भेजना पहला चरण था । अगले चरण में यूनियन की प्रदेश कार्यकारणी का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें प्रदेश के श्रमजीवी पत्रकारों की समस्याओं / मांगों से सम्बन्धित समयबद्ध ज्ञापन सौपेगी । इसके बाद भी पत्रकारों की तकलीफों पर गौर नहीं किया गया तो यूनियन उत्तराखंड के श्रमजीवी पत्रकारों की पिछले कई सालों से लम्बित समस्याओं को लेकर सीधे संघर्ष का रास्ता अपनाएगी । यूनियन के महासचिव प्रयाग पाण्डे ने साफ किया की यूनियन का पहला और अंतिम लक्ष्य राज्य के श्रमजीवी पत्रकारों के हितों की हिफाजत करना है । श्रमजीवी पत्रकारों के हितों के संरक्षण के लिए यूनियन सभी मोर्चों पर संघर्ष करने को कृत संकल्प है ।