Tuesday, September 18, 2012

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने अपनी हडताल १५ अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी

देहरादून,  उत्तराखण्ड अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने अपनी हडताल १५ अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी है। संघर्ष मोर्चा व शासन के मध्य हुए समझौते के अनुसार हडताल पर गए कर्मचारियों के विरूद्ध किसी भी प्रकार की अनुशासनिक कार्यवाही नहीं की जाएगी। हडताल की अवधि के लिए कर्मचारियों को अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।
गौरतलब है कि मोर्चे के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से गत दिनों तीन चक्र में वार्ता हुई थी। वार्ता में बनी सहमति के आधार पर हडताल को १५ अक्टूबर तक के लिए स्थगित किया गया है। वर्तमान में टिहरी उपचुनाव के कारण प्रभावी आचार संहिता के समाप्त होने के बाद मामले को
१५ अक्टूबर २०१२ को कैबिनेट में विचार व निर्णय के लिए प्रस्तुत किया
जाएगा। समझौते के अनुसार निसंवर्गीय पदों के सृजन व उन पर नियुक्ति के लिए निर्गत शासनादेशों को चुनौती देने के लिए मा.उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका पर जवाब देने के लिए राज्य सरकार मा.उच्च न्यायालय से प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय देने के लिए अनुरोध करेगी ताकि कैबिनेट के निर्णय के पश्चात रिट याचिका में प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया जा सके। निसंवर्गीय पदों के सृजन की मानिटरिंग व इन पदों पर नियुक्त कार्मिकों के वेतन आहरण को वित्त विभाग की कम्प्यूटर प्रणाली में लाने के लिए सम्यक निर्देश निर्गत किए जाएंगे। साथ ही निसंवर्गीय पदों के सृजन व उन पर नियुक्ति १५ अक्टूबर २०१२ की कैबिनेट के निर्णय के अधीन रहेगी।
शासन द्वारा हडताल अवधि के लिए संबंधित कर्मी को अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। यदि किसी कर्मी को अर्जित अवकाश देय न हो तो उसके द्वारा भविष्य में अर्जित अवकाश से उक्त अवधि को समायोजित किया जाएगा। जिन कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति में छः माह से कम अवधि शेष है उनको
हडताल की अवधि के दौरान विशेष उपार्जित अवकाश उतनी अवधि का स्वीकृत किया जाएगा। समझौता पत्र मोर्चा के मुख्य संयोजक एसएस वल्दिया, मुख्य सह संयोजक महेश डोबरियाल व प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री/कार्मिक डीके कोटिया द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है।

Saturday, September 1, 2012

वकीलों के तैयार न होने से नहीं हो सकी आचार्य के मामले में बहस

देहरादून। फर्जी डिग्रियों के जरिये पासपोर्ट बनाने के मामले में आचार्य बालकृष्ण व उनके सहयोगी श्री राधा-कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय खुर्जा के प्राचार्य नरेश चंद्र द्विवेदी सीबीआइ स्पेशल मजिस्ट्रेट की अदालत में सोमवार को पेश हुए। सीबीआइ वकील चार्जशीट पर बहस करना चाहती थे, मगर आचार्य के वकीलों ने मना कर दिया कि वह अभी बहस को तैयार नहीं हैं। अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि सात सितंबर तय की है।
फर्जी डिग्रियों के जरिये पासपोर्ट लेने के आरोप में योगगुरु बाबा रामदेव के करीबी एवं पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को सीबीआइ ने गत 20 जुलाई को गिरफ्तार किया था। सीबीआइ ने बालकृष्ण व उनके सहयोगी श्री राधाकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय खुर्जा, बुलंदशहर के प्राचार्य नरेश चंद्र द्विवेदी पर आरोप-पत्र दाखिल किया था। आरोप है कि आचार्य को फर्जी डिग्रियां द्विवेदी ने ही दिलाई थीं। द्विवेदी को दो हफ्ते बाद कचहरी परिसर से उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वे सरेंडर करने जा रहे थे। आचार्य को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जबकि द्विवेदी फिलहाल देहरादून जेल में ही हैं। सोमवार को सीबीआइ स्पेशल मजिस्ट्रेट प्रीतू शर्मा की अदालत में बालकृष्ण और द्विवेदी पेश हुए। पेशी के बाद द्विवेदी को वापस जेल ले जाया गया।

चीनी मिल मजदूरो का जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन

रुद्रपुर। गदरपुर चीनी मिल को बंद करने व अन्य को पीपीपी मोड में देने के खिलाफ किसानों व चीनी मिल मजदूरों ने कलक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के इस निर्णय को किसी दशा में लागू नहीं होने दिया जाएगा।
जिलेभर से किसान व चीनी मिल मजदूर सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए धरना दिया। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत ने प्रदर्शनकारियों की सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार राज्य में यहां के लोगों की भावना के खिलाफ फैसले ले रही है। चीनी मिलों को पीपीपी मोड में देना भी ऐसा ही एक फैसला है। अन्य वक्ताओं ने भी प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लिया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी बीके संत को दिया। ज्ञापन में कहा गया कि गदरपुर चीनी मिल को बंद करने तथा नादेही, सितारगंज, किच्छा व डोईवाल मिलों को पीपीपी मोड में देने का सरकार ने निर्णय लिया है। यह निर्णय यहां के किसानों व चीनी मिल मजदूरों के हित में नहीं है। चीनी मिलें सरकार की गलत नीतियों के कारण घाटे में हैं, क्योंकि गन्ने व चीनी का दाम सरकार तय करती है। ज्ञापन में बीते दिनों कैबिनेट की बैठक में चीनी मिलों के मामले में लिए गए फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई। प्रदर्शन में विधायक राजकुमार ठुकराल, अरविंद पांडे व राजेश शुक्ला, पूर्व सांसद बलराज पासी, भाजपा जिला महामंत्री हितेंद्र त्रिपाठी, राजकुमारी गिरि, किसान नेता चौ. राय सिंह, प्रीतम सिंह, अमित नारंग, जगदीश सिंह, चौ. खिलेंद्र सिंह, करनैल सिंह, राकेश भुड्डी, राजेश गुंबर, पंकज सेतिया, सुरेश कोली, बरीत सिंह, भारत भूषण चुघ, राजेश ग्रोवर आदि शामिल थे।