Sunday, November 25, 2012

रुद्रप्रयाग: ऊखीमठ कुल नुकसान-62 करोड़ अवमुक्त धनराशि-छह करोड़ जख्मों पर नमक

रुद्रप्रयाग: ऊखीमठ त्रासदी को दो माह बीत चुके हैं, लेकिन प्रभावित गांवों की स्थिति जस की तस है। गांवों में आज भी मलबे का ढेर से अटा है। प्रकृति का खौफ भी पीड़ितों के चेहरे पर साफ देखा जा सकता है।
गत 13 सितंबर की रात को ऊखीमठ क्षेत्र में आई तबाही का मंजर आज भी इन गांवों में साफ देखा जा सकता है। दैवीय आपदा को दो महीने से अधिक समय गुजर गया है, लेकिन अभी तक आपदा की छाया यहां साफ देखी जा सकती है। पहले प्रकृति ने इन पर कहर बरवाया, और अब सरकारी सिस्टम ने प्रभावितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया जा रहा है। आज भी बेघर हुए 107 परिवारों को अपना आशियाना नहीं मिल पाया है। पचास से अधिक भवन ऐसे हैं जहां प्रभावित अपने घरों में जाने को तैयार नहीं है, लेकिन प्रशासन के सर्वे में इनका भवन पूर्ण क्षतिग्रस्त ही नहीं दिखाया गया है, अब वह किस्मत और सरकार दोनों को कोस रहे हैं।
जिला प्रशासन ने पूरे प्रभावित क्षेत्र चुन्नी, मंगोली, ब्राहमणखोली, प्रेमनगर, गिरिया आदि में क्षतिग्रस्त भवन, सरकारी योजनाओं, सड़क आदि का कुल आंकलन 62 करोड़ का लगाया है, लेकिन अभी तक सरकारी स्तर पर मात्र छह करोड़ की स्वीकृत हो पाया है। गत गुरुवार को केंद्रीय टीम भी यहां निरीक्षण के लिए पहुंची, लेकिन पीड़ितों के दर्द समझने के बजाय मात्र खानापूर्ति कर चले गए। ऐसे में पीड़ितों की आस भी टूटने लगी है, कि वह फिर से एक बार जीवन की मुख्य धारा में जुड़ सकेंगे।
पीड़ित परिवार-1572
बेघर परिवार-143
लापता-14
कुल नुकसान-62 करोड़
अवमुक्त धनराशि-छह करोड़

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