Wednesday, April 24, 2013

Arushi Murder Case आरुषि-हेमराज को साथ देख राजेश तलवार के सिर पर सवार हुआ खून


गाजियाबाद [जागरण संवाददाता]। बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या के मुख्य आरोपी डा. राजेश तलवार और नूपुर तलवार अब परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर घिरने लगे हैं। मामले के विवेचक व सीबीआइ के एएसपी एजीएल कौल ने कोर्ट में जोड़ी गई कड़ियों के हिसाब से पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि आरुषि व हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखने पर डा.राजेश तलवार ने गोल्फ स्टिक से वार कर हत्याकांड को अंजाम दिया।
सीबीआइ कोर्ट में जिरह के दौरान विशेष लोक अभियोजक आरके सैनी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता सत्यकेतु सिंह में कुछ शब्दों को लेकर खूब नोकझोंक हुई। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 24 अप्रैल की तारीख निश्चित की है। मंगलवार को तलवार दंपती भी अदालत में पेश हुए। बचाव पक्ष से जिरह के दौरान एएसपी कौल ने कहा कि 15/ 16 मई, 2008 की रात घर में डा. राजेश तलवार, डा. नूपुर तलवार, आरुषि व हेमराज मौजूद थे। ड्राइवर मुनेश ने चारों को उस रात को आखिरी बार देखा था। हेमराज पर हमला आरुषि के कमरे में उसके बेड पर हुआ और उसके बाद चादर में लपेटकर व घसीटकर छत पर ले जाया गया। वहां पर उसका गला काटा गया।
रात 12 बजे तक डा.राजेश तलवार अपने कमरे में जागे हुए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आरुषि व हेमराज की मौत का समय रात्रि 12 बजे से एक बजे के बीच का है। डा. राजेश ने अपने कमरे में आवाज सुनी तो वह हेमराज को देखने उसके कमरे में गए, लेकिन वह वहां नहीं मिला। उन्होंने हेमराज के कमरे में रखी दो गोल्फ स्टिक में एक उठा ली। इस दौरान उन्हें यह पता चल चुका था कि आवाज आरुषि के कमरे से आ रही थी। आरुषि के कमरे का दरवाजा बंद नहीं था। डा. राजेश ने गोल्फ स्टिक से हेमराज के सिर पर वार किया। दूसरा वार किया तो हेमराज वहां से हट गया और यह वार सीधा आरुषि के माथे पर लगा। इस दौरान डा. राजेश ने कई वार किए। आवाज पर डा. नूपुर भी आरुषि के कमरे में पहुंच गई। तब तक हेमराज बेड से नीचे गिर गया था।
दोनों ने आरुषि की नब्ज देखी तो उसे मृत पाया। इसके बाद दोनों घबरा गए और हेमराज का कत्ल कर शव को छिपाने और मौका मिलने पर उसको डिस्पोज करने की साजिश रची। इसी उद्देश्य से तलवार दंपती ने हेमराज को चादर में लपेटा और घसीटकर सीढि़यों से छत पर ले गए। एक कोने में छोटे धारदार हथियार से उसका गला चीर दिया। साथ ही कूलर का पैनल निकालकर हेमराज के शव पर रख दिया। इसके बाद चादर व धारदार हथियार लेकर फ्लैट में आ गए। वहां से उन्होंने डबल चादर व एक ताला चाबी लिया और वापस छत पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों आरुषि के कमरे में आ गए और बिस्तर पर अस्त-व्यस्त रखे खिलौने व अन्य सामान को अपनी जगह पर रख दिया। बिस्तर की चादर की सलवटें भी ठीक कर दी और आरुषि का गला धारदार हथियार से काट दिया। ताकि आरुषि व हेमराज के गले के जख्म एक तरह के दिखाई पडे़।
कौल ने कहा कि डा. नूपुर तलवार ने आरुषि के संवेदनशील अंग को साफ किया और उसे अंत:वस्त्र व पायजामा पहना दिया। इसके बाद वहां पडे़ खून को साफ किया। इंटरनेट के राउटर से छेड़छाड़ की। खून से सने कपड़े व धारदार हथियार एक साथ रख दिए। गोल्फ स्टिक भी साफ करके आरुषि के कमरे की दुछत्ती में छिपा दी और सबसे बाहर का दरवाजा अंदर से तथा बीच के लोहे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। इस दौरान डा. राजेश वेलेंटाइन व्हिस्की बिना पानी के पीते रहे और नौकरानी के सामने आरुषि की हत्या का आरोप हेमराज पर मढ़ दिया।

Sunday, April 21, 2013

मिड-डे मील में अंडा करी बनी जी का जंजाल

श्यामपुर। बच्चों को प्रोटीन युक्त खाना मिले, इसके लिए शिक्षा विभाग ने मिड-डे मील के तहत प्रत्येक बुधवार को स्कूलों में अंडाकरी बनाए जाने की व्यवस्था की थी। लेकिन शाकाहारी और मांसाहारी के फेर में मामला थोड़ा उलझ गया है। कुछ भोजन माताएं खाना बनाने में आनाकानी करने लगीं हैं तो कुछ बच्चे खाना खाने से ही परहेज करने लगे हैं।
विभाग ने तीर्थनगरी के समीपवर्ती क्षेत्र न्याय पंचायत श्यामपुर के सभी स्कूलों में मध्याह्न भोजन में प्रत्येक बुधवार को बच्चों के लिए साबूत मसूर की दाल की जगह अंडाकरी बनाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश खंड शिक्षा अधिकारी ने तमाम संकु लों में भेजे हैं।
कई स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे, शिक्षक और भोजन माता विशुद्ध रूप से शाकाहारी हैं। ऐसे में विद्यालयों में अंडाकरी बनाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। कई बच्चों ने तो अंडाकरी बनने के बाद से विद्यालयों में मिड-डे मील खाना ही बंद कर दिया है। अभी नवरात्र के दौरान कई विद्यालयों में अंडाकरी के मीनू को लेकर असमंजस बना रहा कि कैसे इसे बनाया जाए।

Tuesday, April 2, 2013

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने प्रदेश भर से भेजे मुख्यमंत्री को ज्ञापन

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की प्रदेश कार्यकारिणी की हरिद्वार में पिछले महीने 16 मार्च , 2013 को बैठक में लिए गए फैसले के क्रम में मंगलवार को यूनियन की प्रदेश भर की सभी नगर , तहसील और जिला इकाइयाँ अपने जनपद के जिलाधिकारी अथवा नगर में उपलब्ध अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नाम अट्ठारह सूत्रीय मांग - पत्र के ज्ञापन भेजे । 

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन द्वारा प्रदेश के कोने - कोने से मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए ज्ञापनों में प्रदेश में प्रेस मान्यता और विज्ञापन मान्यता समितियों का विधिवत गठन किए जाने , अपर जिला सूचनाधिकारी / सूचनाधिकारी एवं सूचना तथा जन सम्पर्क से प्रत्यक्ष / परोक्ष रूप में जुड़े तमाम पदों की नियुक्ति में इन पदों की शैक्षणिक योग्यता / अहर्ता में पत्रकारिता एवं जन सम्पर्क में स्नातक , स्नातकोत्तर डिप्लोमा या स्नातकोत्तर डिग्री होना अनिवार्य किए जाने ,प्रदेश में तत्काल पारदर्शी सूचना नीति लागू करने और मीडिया परिषद् का गठन किए जाने , राज्य से प्रकाशित अख़बारों और दूसरे समाचार संस्थानों में काम कर रहे श्रमजीवी पत्रकारों को पत्रकारों के लिए गठित वेतन बोर्ड की सिफारिशों के मुताबिक वेतन / भत्ते दिलाए जाने ,राज्य से प्रकाशित तमाम समाचार संस्थानों में डेस्क पर काम करने वाले पत्रकारों एवं ब्लाक स्तर पर कार्य कर रहे पत्रकारों को प्रेस मान्यता दिए जाने ,प्रदेश के सभी श्रमजीवी पत्रकारों का दस लाख रूपये का दुर्घटना बीमा कराये जाने , राज्य के लघु एवं मध्यम श्रेणी के समाचार - पत्र एवं पत्रिकाओं के लिए सुस्पष्ट विज्ञापन नीति बनाए जाने , राज्य सूचना आयोग में प्रदेश के दो वरिष्ट पत्रकारों / संपादकों को सुचना आयुक्त नियुक्त किए जाने , प्रदेश के जिलों , तहसीलों और ब्लाकों से राजधानी आने वाले श्रमजीवी पत्रकारों के लिए पूर्व की भांति देहरादून में तत्काल आवासीय सुविधा बहाल किए जाने सभी समाचार संस्थानों में श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन किया जाना सुनिश्चित किए जाने और उत्तराखंड के हरेक जिला एवं तहसील मुख्यालयों में पत्रकारों की आवासीय कालोनियों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराये जाने आदि मांगें शामिल हैं ।ज्ञापन में यूनियन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि मौजूदा राज्य सरकार श्रमजीवी पत्रकारों की समस्याओं को सरासर अनदेखा कर रही है ।

राज्य मुख्यालय देहरादून में यूनियन के अध्यक्ष अनूप गैरोला के नेतृत्व में प्रदेश के सूचना महानिदेशक विनोद शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया । देहरादून जिला इकाई के महासचिव गिरधर शर्मा ने मांग - पत्र प्रस्तुत किया । यहाँ ज्ञापन देने वालों में यूनियन के प्रांतीय कोषाध्यक्ष अविक्षित रमन , सांगठनिक सचिव भूपेन्द्र कंडारी , दर्शन सिंह रावत , अजय गौतम , विकास गुसाईं , नीरज कोहली , रतन सिंह नेगी आदि वरिष्ट पत्रकार शामिल थे । कुमांऊँ के मंडल मुख्यालय नैनीताल में नैनीताल इकाई के अध्यक्ष माधव पालीवाल के नेतृत्व में जिला मजिस्ट्रेट सुश्री निधिमणि त्रिपाठी को ज्ञापन दिया गया । यहाँ ज्ञापन देने वालों में यूनियन के प्रांतीय महासचिव प्रयाग पाण्डे , भूपेन्द्र मोहन रौतेला , किशोर जोशी , हेम भट्ट , ललित जोशी , कुंवर सिंह देव , सुनील बोरा , प्रवीण कपिल , सुरेश कांडपाल , विनोद कुमार , कांता पाल , धर्मा चंदेल आदि पत्रकार शामिल थे । हल्द्वानी में यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष पंकज वार्ष्वेय के अगुवाई में यूनियन के नैनीताल जिला इकाई के कोषाध्यक्ष गौरव गुप्ता , महेन्द्र नेगी , रवि दुर्गापाल , नाजिम एवं योगेश आदि पत्रकारों ने सिटी मजिस्ट्रेट आई . डी . पालीवाल को ज्ञापन सौंपा । यूनियन की रामनगर इकाई ने यूनियन के अध्यक्ष एवं इलैक्ट्रोनिक मीडिया प्रकोष्ट के प्रांतीय संयोजक गणेश रावत की अगुवाई में प्रभात ध्यानी , जितेन्द्र पपनै , गोविन्द पाटनी , मदन बिष्ट , त्रिलोक रावत और डॉ . जफर जैदी ने एसडीएम के द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा ।

यूनियन की हरिद्वार जिला इकाई के जिला अध्यक्ष डॉ . शिव शंकर जायसवाल की अगुवाई में जिले के जिला अधिकारी सचिन कुर्वे को ज्ञापन दिया गया । ज्ञापन देने वालों में यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ . रजनीकांत शुक्ल , डॉ . हिमांशु द्विवेदी , श्रवण झा , संजय आर्य , दीपक नौटियाल , अमित कुमार , प्रवीन झा ,महेश पारीख , एहसान अंसारी , नरेश सैनी , राम नरेश यादव , जितेन्द्र चौरसिया , बिक्रम झाझर , एवं वेद प्रकाश चौहान आदि पत्रकार शामिल थे । कोटद्वार में वरिष्ट पत्रकार देवेन्द्र सिंह , राज गौरव नौटियाल , जगमोहन रावत , नवीन नेगी , अनिल सती आदि पत्रकारों ने ज्ञापन दिया । जबकि पौड़ी जिले में यूनियन के प्रांतीय सचिव त्रिभुवन उनियाल के नेतृत्व में ज्ञापन दिया गया ।

कुमांऊँ मंडल के सीमान्त जिले पिथौरागढ़ में यूनियन के जिला अध्यक्ष जगदीश कलौनी के नेतृत्व में योगेश पाठक , ललित जोशी , बिजेंद्र लूंठी , प्रकाश पाण्डे , दीपक गुप्ता , मनोज चंद , राकेश पन्त , फरहान अहमद , दिनेश अवस्थी , सुशील खत्री , जीवन सिंह बोरा , एवं दिलीप वाल्दिया आदि पत्रकारों ने जिला प्रशासन के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा । यूनियन की अल्मोड़ा , चम्पावत और बागेश्वर जिले की इकाइयों ने जिला प्रशासन के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे । उधमसिंह जिले में यूनियन के जिला सचिव प्रेम अरोरा के नेतृत्व में जिला प्रशासन के जरिये मुख्यमंत्री को भेजा गया । इसके अलावा उत्तराखंड के दूसरे जिलों से भी यूनियन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजे गए ।

उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव प्रयाग पाण्डे ने कहा कि प्रदेश भर की सभी नगर और जिला इकाइयाँ द्वारा श्रमजीवी पत्रकारों की समस्याओं / मांगों को लेकर अपने - अपने जिलों के जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन भेजना पहला चरण था । अगले चरण में यूनियन की प्रदेश कार्यकारणी का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें प्रदेश के श्रमजीवी पत्रकारों की समस्याओं / मांगों से सम्बन्धित समयबद्ध ज्ञापन सौपेगी । इसके बाद भी पत्रकारों की तकलीफों पर गौर नहीं किया गया तो यूनियन उत्तराखंड के श्रमजीवी पत्रकारों की पिछले कई सालों से लम्बित समस्याओं को लेकर सीधे संघर्ष का रास्ता अपनाएगी । यूनियन के महासचिव प्रयाग पाण्डे ने साफ किया की यूनियन का पहला और अंतिम लक्ष्य राज्य के श्रमजीवी पत्रकारों के हितों की हिफाजत करना है । श्रमजीवी पत्रकारों के हितों के संरक्षण के लिए यूनियन सभी मोर्चों पर संघर्ष करने को कृत संकल्प है ।

Sunday, February 17, 2013

बंद हुई यूनिनॉर की सर्विस


नई दिल्ली : दूरसंचार कम्पनी यूनिनॉर ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए शनिवार रात से मुंबई में अपनी सेवा बंद दी। 
 
यूनिनॉर के प्रबंध निदेशक ने एक बयान में कहा, ‘न्यायालय ने कम्पनी को अपनी सेवा तुरंत बंद करने का आदेश दिया है और सेवा जारी रखने के लिए कंपनी के पास अस्थाई लाइसेंस भी नहीं है। हमारे पास न्यायालय का आदेश मानने और परिचालन बंद करने के सिवाय और कोई चारा नहीं है।’
 
ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने फरवरी 2012 में यूनिनॉर के 22 लाइसेंस रद्द किए थे। कम्पनी में ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाली दूरसंचार कम्पनी टेलीनॉर ने नवंबर 2012 में हुई स्पेक्ट्रम नीलामी में हिस्सा लिया था और छह सर्कलों के लिए स्पेक्ट्रम हासिल किया था। 
 
कंपनी ने मुंबई में अपने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया है कि रोजगार के दूसरे अवसर तलाशने में मदद के साथ ही दूसरे सर्किलों में उन्हें समायोजित करने की कोशिश भी करेगी।

Saturday, February 16, 2013

नामधारी ने मारी थी पॉन्टी के भाई को गोली!


नई दिल्ली. शराब माफिया पॉन्टी चड्ढा मर्डर केस फिर से गर्मा गया है। दिल्ली पुलिस ने पोंटी चड्ढा और उसके भाई हरदीप की हत्या के मामले में उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के बर्खास्त चेयरमैन एसएस नामधारी, उसके गार्ड सचिन त्यागी और दूसरे लोगों के खिलाफ शनिवार को चार्जशीट दायर की है। इसमें नामधारी पर पॉन्टी के भाई हरदीप को गोली मारने का आरोप है। 
 
वहीं इस केस में बीजेपी नेता अरुण जेटली की फोन डिटेल की जांच के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनके खिलाफ साजिश रची जा रही थी? दिल्ली पुलिस के चार दफ्तरों से अरुण जेटली की कॉल डिटेल मांगे जाने पर दिल्ली पुलिस के कान खड़े हो गए हैं। दिल्ली पुलिस के ये चार दफ्तर हैं-एसीपी साउथ का दफ्तर, वसंत विहार पुलिस स्टेशन, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का ऑफिस और एसीपी ऑपरेशन नई दिल्ली का कार्यालय। दिल्ली पुलिस के हेडक्वॉर्टर ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। 
 
जेटली की कॉल डिटेल मांगे जाने के बारे में जब क्राइम ब्रांच से जानकारी ली गई तो बताया गया कि पॉन्टी चड्ढा मर्डर केस की जांच के दौरान चड्ढा बंधुओं के नंबरों की पड़ताल करते समय अरुण जेटली का नंबर सामने आया था। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस को लगता है कि पॉन्टी चड्ढा के भाई हरदीप चड्ढा से मर्डर से एक दिन पहले अरुण जेटली से बात हुई थी। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी क्राइम ब्रांच और एसीपी साउथ दिल्ली की दलीलों से सहमत हैं। लेकिन वसंत विहार पुलिस थाने और एसीपी (ऑपरेशन) नई दिल्ली की दलील से दिल्ली पुलिस का महकमा सहमत नहीं है। जब एसीपी ऑपरेशन नई दिल्ली से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने ऐसे किसी ब्योरे के मांगे जाने से इनकार किया है। 
 
इस मामले में जांच की गई तो अरविंद डबास नाम के एक सिपाही द्वारा राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली का फोन कॉल डिटेल मांगने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया। सिपाही को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है। स्पेशल सेल को इस मामले में दो अन्य लोगों की भी तलाश है। पूछताछ में सिपाही ने कथित तौर पर कहा है कि उसके कुछ पैसे फंसे हुए थे, जिन्हें निकालने के लिए वह कुछ नेताओं के फोन नंबरों का इंतजाम कर उनसे संपर्क साधने की कोशिश कर रहा था। लेकिन दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि उनके महकमे के वरिष्ठ अधिकारी सिपाही की इस 'कहानी' पर अभी भरोसा नहीं कर रहे हैं और उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है।
 
बताया जा रहा है कि 32 साल का सिपाही डबास उत्तराखंड के कुछ बीजेपी नेताओं के संपर्क में था। आरोप है कि संसद मार्ग थाने में तैनात सिपाही अरविंद ने नई दिल्ली में तैनात एसीपी (ऑपरेशन) के ईमेल आईडी को हैक कर अपने लैपटॉप से अरुण जेटली के फोन नंबर की डिटेल एक टेलीकॉम कंपनी से 17 जनवरी को मांगी थी। हालांकि, उस ईमेल में अरुण जेटली के नाम का जिक्र नहीं था, लेकिन जिस नंबर का ब्योरा तलब किया गया था, वह नंबर अरुण जेटली का है। दिल्ली के पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने बताया है कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। 
 बीजेपी ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, 'यह बहुत ही गंभीर मामला है। हम गृह मंत्री से अपील करते हैं कि वह देश को बताएं कि फोन के रिकॉर्ड की मांग किसके कहने पर हुई। यह गैरकानूनी काम है। इस मामले में टेपिंग भी हुई होगी। यह आपातकाल नहीं है। वे दिन बीत चुके हैं। अगर इस मामले में सच सामने नहीं आया तो हम संसद में इसे उठाएंगे।' 

यूनिनॉर और वीडियोकॉन सिम जल्द ही बंद हो सकता है


अगर आप उन मोबाइल कंपनियों के यूजर्स हैं जिनको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, तो जल्द ही आपको तगड़ा झटका लग सकता है। जी हां, आपका सिम जल्द ही बंद हो सकता है। उसमें पड़ा बैलेंस भी डेड बैलेंस हो सकता है। इतना ही नहीं, आपके मोबाइल में आने वाला उस सिम का सिग्नल भी पूरी तरह से ठप्प हो सकता है। अब आप सोच रहे होगें कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्या आदेश दे दिया जो एक साथ इतने झटके लगने जा रहे हैं, तो जनाब यह जान लीजिए कि कोर्ट के इस आदेश से देश के 2.5 करोड़ यूजर्स को एक झटके में कई चीजों से हाथ धोना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपना लाइसेंस गंवा देने वाली टेलीकॉम कंपनियों को अपनी सेवाएं तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत द्वारा सुनाए गए नए आदेश से खासकर वे टेलीकॉम कंपनियां प्रभावित हुई हैं जो 2जी स्पेक्ट्रम की ताजा नीलामी के पहले दौर में असफल साबित हुई थीं अथवा जिन्होंने इसमें शिरकत नहीं की थीं।
साथ ही देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि स्पेक्ट्रम नीलामी के इस दौर में सफल साबित टेलीकॉम कंपनियां अब अपने-अपने सर्किलों में विभिन्न सेवाएं तत्काल शुरू कर सकती हैं। 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी का पहला दौर पिछले साल 12 एवं 13 नवंबर को संपन्न हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के चलते देश के तकरीबन 2.5 करोड़ मोबाइल ग्राहक प्रभावित होंगे। टेलीकॉम उद्योग के सूत्रों का कहना है कि जिन कंपनियों के ग्राहक सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, वे यूनिनॉर और वीडियोकॉन हैं। हालांकि, इस बाबत कंपनियों से संपर्क नहीं हो सका।
यूनिनॉर के उन छह सर्किलों के ग्राहक प्रभावित नहीं होंगे जिसके लिए कंपनी ने नवंबर में हुई बोली प्रक्रिया में लाइसेंस हासिल कर लिया था। इसके अलावा, आइडिया सेल्युलर उन सभी छह सर्किलों में स्पेक्ट्रम हासिल कर चुकी है जिनमें कंपनी का लाइसेंस निरस्त किया गया था। लिहाजा, आइडिया सेल्युलर पर शुक्रवार को हुए फैसले का प्रभाव पडऩे की संभावना नहीं है।
टाटा टेलीसर्विसेज पिछले महीने ही उन तीन सर्किलों में अपना परिचालन बंद कर चुकी है जिनमें उसके लाइसेंस निरस्त हुए थे। कंपनी के पास सभी 19 सर्किलों में लाइसेंस मौजूद है। वीडियोकॉन ने नवंबर में हुई बोली में छह सर्किलों के लिए लाइसेंस हासिल कर लिया है। पहले कंपनी सभी 22 सर्किलों में मौजूद थी।
न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि जिन टेलीकॉम कंपनियों ने 2 फरवरी, 2012 को सुनाए गए लाइसेंस निरस्तीकरण आदेश के बाद भी अपनी सेवाएं जारी रखी हैं उन्हें ताजा नीलामी के पहले दौर के लिए तय रिजर्व प्राइस के आधार पर ही भुगतान करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के तहत 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द किए थे। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2 फरवरी, 2012 को सुनाया गया अदालती आदेश उन टेलीकॉम कंपनियों पर लागू नहीं होगा जिनके पास 900 मेगाहट्र्ज बैंड वाला स्पेक्ट्रम है। खंडपीठ का कहना है कि 900 मेगाहट्र्ज बैंड वाले स्पेक्ट्रम का मसला उसके विचाराधीन नहीं था।
ताजा नीलामी में सफल टेलीकॉम कंपनियां अपने सर्किलों में तुरंत सेवा शुरू कर सकती हैं
रद्द किए गए लाइसेंसों से जुड़े तमाम 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी तत्काल करने को कहा
यूनिनॉर और वीडियोकॉन के ग्राहक अदालती आदेश से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे

एनडीटीवी खबर हेलीकॉप्टर सौदा : किस परिवार को दी गई 200 करोड़ की रिश्वत

नई दिल्ली: बीजेपी ने सरकार से पूछा है कि वह कौन 'परिवार' है, जिसे वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में 200 करोड़ रुपये बतौर रिश्वत देने की बात इटली की अदालत में दाखिल आरोप पत्र में कही गई है।

पार्टी ने हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले की तहकीकात विशेष जांच दल (एसआईटी) से या उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग करते हुए भारत के एक 'परिवार' को रिश्वत दिए जाने के राज़ से पर्दा उठाने की मांग की।

बीजेपी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने इस घोटाले के संदर्भ में पार्टी की ओर से सरकार के सामने छह सवाल रखते हुए उनका जवाब देने को कहा। इन सवालों में प्रमुख है, इटली की अदालत में दाखिल आरोप पत्र में दो जगह परिवार (द फैमिली) को तकरीबन 200 करोड़ रुपये का भुगतान करने का जिक्र किया गया है। देश जानना चाहता है कि यह परिवार कौन है? सवालों में यह भी है कि हेलीकॉप्टर सौदे को अंतिम रूप किसने दिया और उस पर हस्ताक्षर किसने किए, रिश्वत किसने प्राप्त की, हैश्के और एमार एमजीएफ में क्या संबंध है, आईडीएस इंडिया की इस घोटाले में क्या भूमिका है और क्या सरकार ने घोटाले के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए इटली सरकार को पत्र लिखा है।

बीजेपी के एक अन्य नेता वेंकैया नायडू ने हैदराबाद में कहा कि या तो उच्चतम न्यायालय की या फिर संसदीय समिति की निगरानी में विशेष जांच दल गठित करके पूरे मामले की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा, कांग्रेस भेदभावपूर्ण तरीके से जांच का अंत करने के उद्देश्य से सीबीआई के दुरुपयोग के लिए 'कुख्यात' है, इसीलिए बीजेपी को सीबीआई जांच स्वीकार्य नहीं है। सीबीआई की कोई विश्वसनीयता नहीं है और सरकार के इरादे भी संदेहपूर्ण हैं।

नायडू ने संवाददाताओं से कहा, यह मुद्दा वर्ष 2011 में संसद में उठाया गया था और रक्षामंत्री को एक पत्र भी लिखा गया था। इसके बावजूद सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि जब इस मुद्दे पर इटली में मामला दर्ज हुआ और भारतीय बिचौलियों को भी रिश्वत दिए जाने के खुलासे होने लगे, तब सरकार ने सीबीआई जांच की बात की।

जेटली की जासूसी पर कांस्टेबल का कबूलनामा

बीजेपी के सीनियर नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली की कॉल डिटेल्स की जानकारी मांगने के आरोप में गिरफ्तार दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल अरविंद डबास ने पूछताछ में बताया है कि वह उत्तराखंड के प्रोपर्टी डीलर और जेटली के बीच संबंध जानना चाहता था.

पुलिस की पूछताछ में कांस्टेबल डबास ने बताया कि उसका पैसा उत्तराखंड के एक प्रोपर्टी डीलर के पास फंसा हुआ है. प्रॉपर्टी डीलर ने जेटली से फोन कराने को कहा था. प्रोपर्टी डीलर ने कांस्टेबल डबास से भी पैसे लिए.

कांस्टेबल ने बताया कि वह उस प्रॉपर्टी डीलर और जेटली के बीच संबंधों के बारे में जानना चाहता था इसलिए पुलिस ने ईमले भेजने में प्रयुक्त लैपटॉप और हॉर्डडिस्क फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी दी है.

गौरतलब है अरुण जेटली की जासूसी के आरोप में दिल्ली में पुलिस कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया है. दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल अरविंद डबास पर आरोप है कि उसने मोबाइल कंपनी से जेटली की कॉल डिटेल्स मांगी थीं. पुलिस कांस्टेबल ने एसीपी (ऑपरेशंस) के ई-मेल को हैक करके मोबाइल कंपनी से जेटली का नंबर लिखकर कॉल डिटेल्स मांगी थीं.

पुलिस ने डबास को आईटी ऐक्ट के तहत गिरफ्तार तो किया है, लेकिन 2 और लोगों की तलाश की कर रही है. इस मामले में पुलिस ने कुछ दिन पहले केस दर्ज किया था.

ऐसे सवाल उठाए जा रहे है कि आखिर कांस्टेबल ने जेटली की ही कॉल डिटेल्स क्यों मंगवाई, प्रोपर्टी डीलर की क्यों नहीं मंगवाई. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले के तार उत्तराखंड के कुछ नेताओं से जुड़े हो सकते हैं.

आसान हों निवेश नियम तो बने बात

अगर उद्योग जगत के सुझावों को वित्त मंत्री मान लेते हैं तो राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना (आरजीईएसएस) एक ओपन एंडेड उत्पाद होगा और इसमें निवेश शर्तों में भी ढील जा सकती है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शनिवार को कहा था कि छोटे निवेशकों को आकर्षित करने और आरजीईएसएस में निवेश आसान बनाने की कुछ घोषणा की जा सकती है।
म्युचुअल फंड उद्योग से जुड़े चार अधिकारियों ने कहा कि क्लोज एंडेड प्रारूप आरजीईएसएस की राह में बड़ी बाधा है। इस तरह की योजना में निवेशक एक तय समय से पहले अपना निवेश नहीं निकाल सकते हैं। ऐसे में उद्योग चाहता है कि आरजीईएसएस में बदलाव किया जाए ताकि निवेशक अपना पैसा अपने हिसाब से निकाल सकें।
आरजीईएसएस को खास तौर से पहली बार शेयर बाजार में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों को आकर्षित करने के लिए लाया गया है। इसमें 10 लाख रुपये सालाना आय कमाने वाले निवेशक 50,000 रुपये तक निवेश के जरिये कर में छूट पा सकते हैं। म्युचुअल फंड उद्योग का कहना है कि इसमें पहले साल ही कर रियायत की अनुमति दी गई है, जिसमें बदलाव की दरकार है। उद्योग इसमें निवेश पर स्थायी तौर से कर रियायत की मांग कर रहा है। म्युचुअल फंड के एक मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि पहली बार कर रियायत मिलने से निवेशक इसमें कर लाभ के लिए एक बार निवेश कर इसे भूल जाएंगे।
इसके साथ ही आरजीईएसएस में निवेश केवल डीमैट खाते के जरिये ही करने की अनुमति है। लेकिन उद्योग का कहना है कि ज्यादातर म्युचुअल फंड योजनाएं वितरकों के जरिये बेची जाती हैं। बैंक प्रायोजित म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक ने कहा, 'पहली बार निवेश करने वालों को डीमैट खाता खुलवाने के लिए मनाना कठिन होगा। और खाता खुलवाने और उसका सालाना शुल्क भी इसकी राह में बड़ी अड़चन बन सकता है।

ट्यूलिप टेलीकॉम को 85 करोड़ रुपये का घाटा

व्यापक आर्थिक माहौल में मंदी के रूख के बीच ट्यूलिप टेलीकॉम को 31 दिसंबर 2012 को समाप्त तिमाही में 84.99 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध घाटा हुआ। पूर्व वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 77.25 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। ट्यूलिप टेलीकॉम ने बीएसई को सूचित किया है कि आलोच्य तिमाही में कंपनी की कुल आमदनी 23 फीसदी घटकर 528.67 करोड़ रुपये हो गई जो पहले 686.59 करोड़ रुपये थी। कंपनी पर लगभग 2700 करोड़ रुपये का कर्ज है।

Saturday, February 9, 2013

अफजल गुरु को आज सुबह 8 बजे फांसी


नई दिल्‍ली. अजमल आमिर कसाब के बाद अब 2001 में संसद पर हुए हमले के मामले में दोषी करार दिए गए अफजल गुरु को फांसी दे दी गई है। अफजल गुरु को आज सुबह तिहाड़ जेल में गुपचुप तरीके से फांसी दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने अफजल की फांसी की सजा सुनाई थी। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने करीब हफ्ते भर पहले ही अफजल की दया याचिका खारिज कर दी थी। केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने अफजल को फांसी दिए जाने की पुष्टि कर दी है। उन्‍होंने कहा कि सुबह 8 बजे उसे फांसी दी गई। गृह मंत्रालय भी इस बारे में थोड़ी देर में औपचारिक ऐलान कर सकता है।
इस बीच, किसी तरह की अनहोनी की आशंका के मद्देनजर जम्‍मू-कश्‍मीर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। श्रीनगर सहित सूबे के तमाम शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है। जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस को कल ही अलर्ट कर दिया गया था। राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में भी सुरक्षा के इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं। दिल्‍ली में अतिरिक्‍त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने मुंबई में भी अलर्ट के निर्देश जारी किए हैं।

Monday, February 4, 2013

कनेक्शनों के लिए डी-ऐक्टिवेटिंग मार्च तक अंतिम


बंद पड़े मोबाइल कनेक्शनों को निष्क्रिय बनाए जाने की पहल मार्च तक पूरी हो सकती है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का मानना है कि गैर-इस्तेमाल वाले मोबाइल कनेक्शनों के लिए डी-ऐक्टिवेटिंग सेवाओं के संबंध में सिफारिशों को मार्च तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
ट्राई के सचिव राजीव अग्रवाल ने कहा, 'सामान्य तौर पर इसमें डेढ़ महीने का समय लगना चाहिए।Ó पिछले साल दिसंबर में नियामक ने 'नंबरों के गैर-इस्तेमालÓ या 'बंद पड़े सिम कनेक्शनÓ के आधार पर ऑपरेटरों द्वारा ग्राहकों की सेवाओं को मनमाने ढंग से समाप्त किए जाने की समस्या पर बहस शुरू की थी।
ऑपरेटरों द्वारा ट्राई को मुहैया कराई गई जानकारी के अनुसार पूरे देश में लगभग 20 करोड़ बंद सिम हैं जिनका ग्राहकों द्वारा खास अवधि से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। हालांकि ये सिम 128.9 करोड़ रुपये के कुल बैलेंस से जुड़़े हुए हैं।

Monday, January 7, 2013

मैरिज वेबसाइट के जरिये मिली युवती ने लाखों ठगे



देहरादून: एक मैरिज वेबसाइट पर जीवनसाथी की तलाश कर रहे दून के एक शख्स को लाखों की चपत लग गई। मामले में युवती व उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। मामला वर्ष 2009 का है। जीएमएस रोड सांई एनक्लेव निवासी अरविंद कुमार पेशे से मेडिकल डिस्ट्रीब्यूटर हैं। वसंत विहार पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक अरविंद ने एक मैरिज वेबसाइट पर अपने लिए जीवन साथी की तलाश शुरू की। इस दौरान उन्होंने वेबसाइट पर नागपुर महाराष्ट्र निवासी नेहा शर्मा पुत्री मोहिनी शर्मा का प्रोफाइल देखा। विज्ञापन में नेहा ने खुद को सरकारी विभाग में कार्यरत होना बताया। इस बीच दोनों का ऑनलाइन संपर्क हुआ और दोनों ऑनलाइन चैट करने लगे और कुछ ही दिनों में नंबर भी एक्सचेंज हो गए। इस दौरान कई बार दोनों के बीच मोबाइल पर बात भी हुई। पुलिस के मुताबिक इस दौरान नेहा ने अपने भाई रमेश निवासी नागपुर, दोस्त गजेन्द्र व शोभा निवासी विवेकनगर, बंगलुरू एवं एलेक्जेंडर निवासी संघदूर प्रकाशम विहार, आंध्र प्रदेश से भी बात की। पुलिस के अनुसार इस दौरान नेहा ने अपनी मां को कैंसर पीडि़त होने का हवाला देकर कई बार अरविंद से रुपये लिए। अब वह उसका फोन भी नहीं उठा रही। थाना वसंत विहार में चारों आरोपियों के खिलाफ आइटी एक्ट के अंतर्गत धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है।