Saturday, February 16, 2013

आसान हों निवेश नियम तो बने बात

अगर उद्योग जगत के सुझावों को वित्त मंत्री मान लेते हैं तो राजीव गांधी इक्विटी बचत योजना (आरजीईएसएस) एक ओपन एंडेड उत्पाद होगा और इसमें निवेश शर्तों में भी ढील जा सकती है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शनिवार को कहा था कि छोटे निवेशकों को आकर्षित करने और आरजीईएसएस में निवेश आसान बनाने की कुछ घोषणा की जा सकती है।
म्युचुअल फंड उद्योग से जुड़े चार अधिकारियों ने कहा कि क्लोज एंडेड प्रारूप आरजीईएसएस की राह में बड़ी बाधा है। इस तरह की योजना में निवेशक एक तय समय से पहले अपना निवेश नहीं निकाल सकते हैं। ऐसे में उद्योग चाहता है कि आरजीईएसएस में बदलाव किया जाए ताकि निवेशक अपना पैसा अपने हिसाब से निकाल सकें।
आरजीईएसएस को खास तौर से पहली बार शेयर बाजार में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों को आकर्षित करने के लिए लाया गया है। इसमें 10 लाख रुपये सालाना आय कमाने वाले निवेशक 50,000 रुपये तक निवेश के जरिये कर में छूट पा सकते हैं। म्युचुअल फंड उद्योग का कहना है कि इसमें पहले साल ही कर रियायत की अनुमति दी गई है, जिसमें बदलाव की दरकार है। उद्योग इसमें निवेश पर स्थायी तौर से कर रियायत की मांग कर रहा है। म्युचुअल फंड के एक मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि पहली बार कर रियायत मिलने से निवेशक इसमें कर लाभ के लिए एक बार निवेश कर इसे भूल जाएंगे।
इसके साथ ही आरजीईएसएस में निवेश केवल डीमैट खाते के जरिये ही करने की अनुमति है। लेकिन उद्योग का कहना है कि ज्यादातर म्युचुअल फंड योजनाएं वितरकों के जरिये बेची जाती हैं। बैंक प्रायोजित म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक ने कहा, 'पहली बार निवेश करने वालों को डीमैट खाता खुलवाने के लिए मनाना कठिन होगा। और खाता खुलवाने और उसका सालाना शुल्क भी इसकी राह में बड़ी अड़चन बन सकता है।

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