अगर आप उन मोबाइल कंपनियों के यूजर्स हैं जिनको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, तो जल्द ही आपको तगड़ा झटका लग सकता है। जी हां, आपका सिम जल्द ही बंद हो सकता है। उसमें पड़ा बैलेंस भी डेड बैलेंस हो सकता है। इतना ही नहीं, आपके मोबाइल में आने वाला उस सिम का सिग्नल भी पूरी तरह से ठप्प हो सकता है। अब आप सोच रहे होगें कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्या आदेश दे दिया जो एक साथ इतने झटके लगने जा रहे हैं, तो जनाब यह जान लीजिए कि कोर्ट के इस आदेश से देश के 2.5 करोड़ यूजर्स को एक झटके में कई चीजों से हाथ धोना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपना लाइसेंस गंवा देने वाली टेलीकॉम कंपनियों को अपनी सेवाएं तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत द्वारा सुनाए गए नए आदेश से खासकर वे टेलीकॉम कंपनियां प्रभावित हुई हैं जो 2जी स्पेक्ट्रम की ताजा नीलामी के पहले दौर में असफल साबित हुई थीं अथवा जिन्होंने इसमें शिरकत नहीं की थीं।
साथ ही देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि स्पेक्ट्रम नीलामी के इस दौर में सफल साबित टेलीकॉम कंपनियां अब अपने-अपने सर्किलों में विभिन्न सेवाएं तत्काल शुरू कर सकती हैं। 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी का पहला दौर पिछले साल 12 एवं 13 नवंबर को संपन्न हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के चलते देश के तकरीबन 2.5 करोड़ मोबाइल ग्राहक प्रभावित होंगे। टेलीकॉम उद्योग के सूत्रों का कहना है कि जिन कंपनियों के ग्राहक सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, वे यूनिनॉर और वीडियोकॉन हैं। हालांकि, इस बाबत कंपनियों से संपर्क नहीं हो सका।
यूनिनॉर के उन छह सर्किलों के ग्राहक प्रभावित नहीं होंगे जिसके लिए कंपनी ने नवंबर में हुई बोली प्रक्रिया में लाइसेंस हासिल कर लिया था। इसके अलावा, आइडिया सेल्युलर उन सभी छह सर्किलों में स्पेक्ट्रम हासिल कर चुकी है जिनमें कंपनी का लाइसेंस निरस्त किया गया था। लिहाजा, आइडिया सेल्युलर पर शुक्रवार को हुए फैसले का प्रभाव पडऩे की संभावना नहीं है।
टाटा टेलीसर्विसेज पिछले महीने ही उन तीन सर्किलों में अपना परिचालन बंद कर चुकी है जिनमें उसके लाइसेंस निरस्त हुए थे। कंपनी के पास सभी 19 सर्किलों में लाइसेंस मौजूद है। वीडियोकॉन ने नवंबर में हुई बोली में छह सर्किलों के लिए लाइसेंस हासिल कर लिया है। पहले कंपनी सभी 22 सर्किलों में मौजूद थी।
न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि जिन टेलीकॉम कंपनियों ने 2 फरवरी, 2012 को सुनाए गए लाइसेंस निरस्तीकरण आदेश के बाद भी अपनी सेवाएं जारी रखी हैं उन्हें ताजा नीलामी के पहले दौर के लिए तय रिजर्व प्राइस के आधार पर ही भुगतान करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के तहत 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द किए थे। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2 फरवरी, 2012 को सुनाया गया अदालती आदेश उन टेलीकॉम कंपनियों पर लागू नहीं होगा जिनके पास 900 मेगाहट्र्ज बैंड वाला स्पेक्ट्रम है। खंडपीठ का कहना है कि 900 मेगाहट्र्ज बैंड वाले स्पेक्ट्रम का मसला उसके विचाराधीन नहीं था।
ताजा नीलामी में सफल टेलीकॉम कंपनियां अपने सर्किलों में तुरंत सेवा शुरू कर सकती हैं
रद्द किए गए लाइसेंसों से जुड़े तमाम 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी तत्काल करने को कहा
यूनिनॉर और वीडियोकॉन के ग्राहक अदालती आदेश से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे
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